किरकिट कथा / योगेश किसलय
एक तो चार साल में आप कराते है विश्व कप , और धमकी देते हैं कि अगले विश्व कप २०१५ में टेस्ट खेलने वाले दस देश ही शामिल होंगे . उनका तर्क है कि छोटी टीमे खेलती है तो भीड़ नहीं जुटती और मुकाबला एकतरफा होता है .
दरअसल क्रिकेट को अभी केवल अभिजात्य वर्ग का खेल बनाने पर आमादा हैं कुछ खेल अधिकारी जिसमे हाल में सबसे तल्ख़ टिप्पणी करने वाले सबसे चर्चित शख्स हैं आई सी सी के हारुन लोर्गट . अभी विश्व कप की शुरुआत भी नहीं हुई थी कि छोटी टीमो का मनोबल तोड़ने वाला बयान लोर्गट ने दे डाली .लेकिन उनके बयान पर तमाचा जड़ा आयरलैंड ने .दरअसल आयरलैंड ने तो शुरुआत की है अभी कई टीमो की इज्जत डूबेगी कहना मुश्किल है .इतिहास गवाह है भारत पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया तक को इन छोटी टीमो ने औकात दिखाई है . भारत और पाकिस्तान तो जिस तरह बेआबरू होकर पिछले विश्व कप से लौटे थे उसकी कसक अभी भी सालती है . भारत भी जब विश्व कप जीता था तो इसे छोटी टीम ही आँका गया था . और अब तक के विश्व कप में कई चमत्कार होते रहे हैं. कनाडा हो या तब की श्रीलंका , बंगला देश हो या आयरलैंड जिम्बाब्वे हो या नीदरलैंड सबने रह रह कर अपनी चमक दिखाई जिस चमक से पूरा विश्व कप चौंधियाता रहा है . तिरासी के विश्व कप का सबसे बड़ी खबर भारत का विश्व कप जीतना था लेकिन कहानी बनी जिम्बाब्वे .के साथ भारत का मैच . कपिल के १७५ रन न होते तो न भारत में एकदिनी मैचो की लोकप्रियता बढती और सबसे धनी क्रिकेट संघ बी सी सी आई , आई पी एल जैसे मजमा लगाकर कैरी पैकर की तरह बड़े बड़े खिलाडियों को हांकने की कोशिश नहीं करता . सनद रहे कि आज की तारीख में पैसे के दम पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड अपने शीर्ष संगठन आई सी सी को घुटने टिकवाता रहता है . कहने का मतलब यह है कि एक चमत्कार किसी भी टीम के लिए नया जोश नया ,माहौल , नयी ऊँचाइयाँ और सफलता के नए राह चुनने का मौका देता है .बंगला देश में कभी फूटबाल का रंग तारी होता था अब क्रिकेट ने वह जगह ले ली है . अगर मैचो में भीड़ और रोचकता ही सबसे बड़े करक तत्व हैं तो क्यों नहीं टॉप के चार टीमो के बीच सेमी फ़ाइनल और फ़ाइनल करा कर आई सी सी अपनी जिम्मेवारी से मुक्त हो जाता है . हम भले ही आज अपने मुह मिया मिठ्ठू बने रहे लेकिन व्सच्चाई यह है कि विश्वविजेता टीम का तमगा धारण करने वाला देश महज आठ दस देशो ( जो क्रिकेट खेलते हैं ) के ही सरताज होते हैं . यह तो एसोसियेट देशो का धन्यवाद दीजिये कि बार बार हार का दंश झेलने के बावजूद वे विश्वकप में खेलने आ जाते हैं और संख्याबल बढ़ा कर विश्कप खेलने वाले देशो की संख्या को लेकर हमारी लाज बचाते रहते हैं . और ये छोटी टीमे जब चमत्कार करते हैं तो उन्हें भरोसा दिलाने वाला बर्ताव करना चाहिए
क्रिकेट को विश्व व्यापी बनाने की जरूरत है चंद देश आपस में ही भिड़ते हैं और रैन्किंक का लेखा जोखा कर लेते हैं . घूम फिरकर आठ दस टीमो के बीच ही टॉप टेन का निर्णय कर लिया जाता है . ग्यारहवां देश कौन है यह कोई नहीं जानता. इसीलिए ज्यादा सनसनी तभी फैलती है , ज्यादा बड़ी खबर तभी बनती है और क्रिकेट की बड़ी कहानिया तभी बनती है जब ये छोटी टीमे बड़ा उलटफेर करती है . लोर्गट साहब अगर तीन टीमे ही क्रिकेट खेलेंगी तो हर किसी को कुछ न कुछ पुरस्कार मिल ही जायेगा इसलिए प्रतियोगिता को जरा व्यापक बनाइये क्रिकेट को और फैलाइए तभी क्रिकेट फूटबाल का जुनून पैदा कर सकेगा .इसी में क्रिकेट की , क्रिकेट अधिकारियो की और क्रिकेट प्रेमियों की भलाई है .
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